Mirza Ghalib

Mirza Ghalib

Classic poet · Public-domain works
मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ाँ ग़ालिब (1797–1869) · Mirza Ghalib उर्दू और फ़ारसी के सबसे महान शायर, मुग़ल दरबार के अंतिम दौर के कवि। उनकी ग़ज़लें प्रेम, दर्द, दर्शन और ज़िंदगी की विडंबनाओं को बेमिसाल अंदाज़ में बयान करती हैं। उनके ख़त भी उर्दू गद्य की धरोहर हैं।
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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

4 days ago · 1 min read 6 0 0

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार या इलाही ये माजरा क्या है मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ काश पूछो कि मुद्दआ क्या है

4 days ago · 1 min read 5 0 0
Shayari

दिल के ख़ुश रखने को

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है

4 days ago · 1 min read 5 0 0